ट्रिपल तलाक पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का फैसला, EXPERTS ने बताए मायने

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ट्रिपल तलाक पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का फैसला, EXPERTS ने बताए मायने

लखनऊ.ऑल इंडिया मुस्ल‍िम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने दो दिनों की बैठक के बाद रविवार को कहा कि ट्रिपल तलाक का गलत इस्तेमाल करने वाले का सोशल बायकॉट किया जाएगा। AIMPLB सेक्रेटरी जफरयाब जिलानी ने कहा, “1972 में गठन के 45 साल बाद बोर्ड ने ऐसा फैसला लिया है।” Q&A में समझिए बोर्ड का फैसला…
 
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Q. ट्रिपल तलाक पर लिए गए इस फैसले में खास क्या है?
A. जफ़रयाब जिलानी ने कहा, “1972 में AIMPLB बनाया गया। पहली बार ऐसा फैसला लिया गया कि ट्रिपल तलाक का गलत इस्तेमाल करने वाले का सोशल बायकॉट किया जाएगा। अभी तक हम गलत तरीके से तलाक देने वालों के खिलाफ इंटरनल इन्क्वायरी तो जारी करते थे, लेकिन वो जमीनी नहीं हो पाती थी।”
जफरयाब जिलानी ने कहा, “जब पुरुष गुस्से में, नशे में या फिर बिना तलाक की नीयत से एक साथ 3 बार तलाक बोल देता है, तो शरियत के हिसाब से उसे गुनाह माना जाता है। लेकिन, इस तरह से दिए गए तलाक को भी मान लिया जाता है। अब बोर्ड ने इस तरह से तलाक देने वालों का सोशल बायकॉट करने का निर्देश दिया है।”

Q. ट्रिपल तलाक पर कोड ऑफ कंडक्ट जारी करने के पीछे मकसद?
“हमने इस मसले पर कोड ऑफ़ कंडक्ट जारी किया है। इसे हर शख्स तक पहुंचाया जाएगा। इसे मस्जिदों में नमाज के दौरान भी पढ़कर बताया जाएगा।”

Q. सोशल बायकॉट का मतलब और इसे अमल में कैसे लाएंगे?
A. बोर्ड मेंबर मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा, “45 सालों में पहली बार सोशल बायकॉट का फैसला लिया गया। ऐसे शख्स से कौम के लोग कोई रिश्ता नहीं रखेंगे। किसी भी प्रोग्राम में उसे बुलाया नहीं जाएगा और न कोई उनके परिवार में जाएगा। उससे किसी भी तरह का लेन-देन नहीं होगा। दुआ-सलाम भी नहीं की जाएगी।”

Q. ट्रिपल तलाक होता क्या है?
A. फरंगी महली ने कहा, “हमारे मजहब में तीन स्टेप में तलाक होता है। अगर मियां-बीवी में नहीं बन रही है, तो पहले महीने में पहला तलाक देकर पत्नी को छोड़ दे, लेकिन इससे पहले दोनों को आपस में बात करनी चाहिए। इसके बाद इद्दत का वक्त शुरू होगा। इद्दत यानी तलाक के 3 महीने 13 दिन तक महिला घर से बाहर नहीं जा सकती है। अगर वो बाहर जाती है, तो उसे सूरज ढलने से पहे घर वापस आना पड़ेगा। तलाक के पहले महीने में पति-पत्नी में समझौता नहीं होता है, तो पति दूसरे महीने में दूसरा तलाक दे दे। लेकिन, इससे पहले दोनों पक्षों के लोगों को मियां-बीवी को समझाना चाहिए। इसके बाद तीसरा तलाक देकर रिश्ता खत्म कर सकते हैं।”

व्हॉट्सऐप, पोस्टकार्ड, ई-मेल या कुरियर के जरिये दिया तलाक माना जाएगा?

Q. व्हॉट्सऐप, पोस्टकार्ड, ई-मेल या कुरियर के जरिये दिया तलाक माना जाएगा?
A. बोर्ड के महासचिव वली रहमानी ने कहा, “शरियत के हिसाब से व्हॉट्सऐप, पोस्टकार्ड, कुरियर से भी तलाक भेजा गया, तो वह भी माना जाएगा। बोर्ड का मानना है कि जिस तरह से शादी के लिए पोस्टकार्ड से दावतनामा भेजा जाता है और हम उसे मानते हैं। ऐसे किसी जरिए से दिया गया तलाक भी माना जाएगा।”
 
Q. एक साथ तीन तलाक दिया, तो महिला के साथ कैसे इंसाफ होगा?
A. जफरयाब जिलानी कहा, “एक साथ 3 बार बोलकर दिया गया तलाक भी मान्य होता है। अगर महिला पर्सनल लॉ बोर्ड के पास आती है, तो उसे उसके पति से उसका हक़ दिलवाया जाएगा। अगर गलत तरह से तलाक देना पाया गया, तो सोशल बायकॉट किया जाएगा।”
 
Q. तलाक के लिए महिलाओं को क्या हक मिला है?
A. बोर्ड मेंबर डॉ. असमां जेहरा ने बताया, “महिलाओं को तलाक मामले में 2 हक मिले हैं। ‘खुला’ और ‘फस्ख-ए-निकाह’। ‘खुला’ में महिला अगर पति के साथ नहीं रहना चाहती है, तो दारुल क़ज़ा (शहर काजी की कोर्ट) में अपील कर सकती है। उलेमा पति को बुलाकर उसकी राय भी पूछता है और फिर फैसला सुनाता है। ‘फस्ख-ए-निकाह’ में महिला पति के साथ नहीं रहना चाहती, तो दारुल-क़ज़ा जा सकती है। वहां पति को बुलाया जाता है और अगर वह नहीं आता है, तो उलेमा महिला के फेवर में एकतरफा फैसला सुना सकता है।”
 
Q. AIMPLB महिलाओं की बराबरी की बात कर रहा है?
A. डॉ. असमां जेहरा ने बताया, “पहली बार बोर्ड ने महिलाओं के लिए एक बड़ा फैसला लिया। अभी तक महिला के घर वाले दहेज़ देते थे। अब बोर्ड ने तय किया है कि बेटियों को भी घर की जायदाद में हिस्सा मिलेगा। इस फैसले के बाद महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी।”
 
Q. संविधान के हिसाब से मसला क्यों हैंडल नहीं करते, जैसे बाबरी केस में स्टैंड लिया?
A. जफरयाब जिलानी ने कहा, “संविधान में हमें धार्मिक अधिकार दिए गए हैं। ट्रिपल तलाक हमारा मजहबी कानून है। सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक का मामला पेंडिंग है। जहां तक बाबरी का सवाल है, तो वह प्रॉपर्टी का मामला है और हमारी आस्था जुड़ी हुई है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर जो भी डिसीजन देगा, उसे हम मानेंगे।”
 
Q. ये मुद्दा देश में बेहद चर्चा में है, क्या कहेंगे?
A. फरंगी महली ने कहा, “मौजूदा सियासी तस्वीर में इसे पॉलिटिकल इश्यू बनाया जा रहा है। जबकि, ट्रिपल तलाक के मामले काफी कम तादाद में हैं। बेहतर है कि पॉलिटिकल लीडर्स इसे इश्यू बनाने की बजाय मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों के लिए अच्छी शिक्षा और रोजगार का प्रबंध करें। ऐसा करने से इन मामलों में अपने आप कमी आ जाएगी।
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