क्या वाकई झूठ था नील आर्मस्ट्रांग का चाँद पर जाना, इन तस्वीरों से तो यही लगता है !

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    क्या वाकई झूठ था नील आर्मस्ट्रांग का चाँद पर जाना, इन तस्वीरों से तो यही लगता है !

     20 जुलाई, 1969 का दिन मानव इतिहास के लिए खास माना जाता है। क्यूंकि इस दिन इंसान ने पहली बार चंद्रमा पर कदम रखा था। जब पहली बार इंसान चाँद पर गया तो कई सपनों को एक नई शुरुआत मिली! इंसान ने सारे ब्रम्हांड को एक तरह से बता दिया कि नई जगहों का अन्वेषण करने के लिए वह अब तैयार है और पृथ्वी से आगे बढ़ने में अब इंसान को कोई दिक्कत नहीं!

    नील आर्मस्ट्रांग पहले मनुष्य थे जो चाँद पर उतरे और फिर उसके बाद एडविन एल्ड्रिन चाँद पर उतरे. यह कारनामा था अमेरिका के NASA का अपोलो 11 मिशन का! लेकिन इस मिशन में कई ऐसी बातें थीं जो बिलकुल समझाई नहीं जा सकती. कुछ विशेषज्ञों का मानना है की अमेरिका रूस के पहली बार अंतरिक्ष में जाने से चिढ़ गया था। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए उसने अमेरिकी सरकार और नासा ने चांद पर जाने का स्वांग रचा

    देखिये अमेरिका के चन्द्र मिशन से जुड़े ऐसे 7 तथ्यों को जिनका आज तक कोई जवाब नहीं मिला..

    1. लहराता हुआ अमरीकी झंडा

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    जब चाँद पर वातावरण ही नहीं है, तो अमेरिका का झण्डा हवा में कैसे उड़ रहा है? नासा की तरफ से जारी किये फोटोज और वीडियो में अमेरिका के झण्डे को चाँद में हवा में उड़ते हुए साफ़-साफ़ देखा जा सकता है।

    2. चाँद पर पैरों के निशान

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    चाँद पर नील आर्मस्ट्रॉन्ग के पैरो के निशान को देखिये। यह बहुत ही अजीब है कि चाँद की सतह पर कोई कैसे इतना स्थिर निशान बना सकता है क्योंकि चन्द्रयान जिसका वजन 4 टन था उसने चन्द्रमा पर कोई निशान नहीं छोड़े, तो फिर आर्मस्ट्रॉन्ग के पैरों के निशान कैसे बन गए। यहां ध्यान देने वाली बात कि चाँद का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के 1/6 है।

    3. हेलमेट में दिखाई देती स्पॉट लाइट

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    इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि अंतरिक्ष यात्री के हेलमेट पर स्पॉट लाइट प्रतिबिंब दिखाई दे रहा है. चाँद पर एक पहले से ही मौजूद स्पॉट लाइट क्या कर रही है. तो क्या अपोलो 11 मिशन स्टूडियो में शूट किया गया था? या फिर इसके पीछे और कई रहस्य छुपे हुए हैं

    4. अभी तक नहीं मिले ब्लू प्रिंट्स

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    इस मिशन की मशीन के ब्लूप्रिंट्स आज तक किसी ने नहीं देखे। अमेरिका का कहना है कि वो किसी तरह से गायब हो गए। हालांकि किसी भी देश का चन्द्रमा पर पहुँचना एक क्रांतिकारी घटना है, तो अमेरिका इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकता है?

    5. कहीं तारे नज़र नहीं आते

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    इस तस्वीर को ध्यान से देखें तो आपको कहीं तारे नज़र ही नहीं आएँगे. चाँद पर तारों का नज़र नहीं आना एक बेहद ही अजीब बात है क्योंकि चाँद पर कोई वायुमंडल नहीं है तो फिर चाँद से अंतरिक्ष में स्थित चीज़ें बिना किसी दिक्कत से दिखनी चाहिए लेकिन इस तस्वीर में तारे दिख ही नहीं रहे हैं.

    6. दूसरा मिशन इतने समयांतराल के बाद क्यूँ ?

     

    अमेरिकन सरकार 2018 में कथित तौर पर दोबारा चाँद पर जाने की योजना बना रही है। हालांकि अमेरिका 1969 में चाँद पर पहुँचने वाला पहला देश बन गया था, तो फिर दोबारा चाँद पर जाने के बीच इतने सालों का अंतराल क्यों?

    हालांकि अमेरिका समय-समय पर इन सभी सवालों के जवाब देता रहा है, लेकिन दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के इतने बड़े मिशन में इतनी सारी गलतियां कैसे हो सकती हैं।

    7. स्टैनली कूब्रिक के निर्देशन में बनी थी इस तरह की फिल्म

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    दुनिया भर में बहुत लोग यह सोचते हैं कि अपोलो 11 मिशन, हॉलीवुड के मशहूर निर्देशक स्टैनली कूब्रिक ने निर्देशित किया था. ऐसा माना जाता है कि 2001: A Space Odyssey के निर्देशन के बाद जो कि कूब्रिक की फिल्म थी जिसमें कूब्रिक ने चाँद की सतह को बड़े अच्छे तरीके से दिखाया था, NASA ने कूब्रिक को अपोलो मिशन बनाने को कहा! यह एक बेहद ताकतवर षड्यंत्र सिद्धांत है.