#UriAttack: सेना के हथियार नष्ट करने के इरादे आए थे आतंकी

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#UriAttack: सेना के हथियार नष्ट करने के इरादे आए थे आतंकी

पाकिस्तानी सेना ने एलओसी पर भारतीय सेना के आयुध भंडारों को नष्ट करने की साजिश रची है। उड़ी में सैन्य शिविर पर फिदायीन हमला इसी साजिश का नतीजा था।

उड़ी में सेना की12वीं बिग्रेड का मुख्यालय अत्याधुनिक हथियारों का बड़ा डिपो है। यहां से सेना की 17 बटालियनों के लिए हथियारों और रसद की सप्लाई होती है। जैश-ए-मोहम्मद ने इस मुख्यालय को तबाह कर सेना की ताकत कम करने का षडयंत्र रचा था जिसे नाकाम कर दिया गया है।

अगर आतंकी अपने मंसूबे में कामयाब होते तो उत्तरी कश्मीर में सेना को हथियारों की सप्लाई मुश्किल हो जाती। साथ ही एलओसी पर सीजफायर का उल्लंघन कर आतंकियों की बड़ी खेप को भारतीय सीमा में आसानी से भेजा जा सकता था।

इससे पहले पुंछ में 93 ब्रिगेड के मुख्यालय पर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने मिनी सचिवालय को अपना केंद्र बनाया था जहां से ब्रिगेड मुख्यालय बिल्कुल करीब है। इस ब्रिगेड में भी बड़ा आयुध डिपो है। सांबा और कठुआ में भी आयुध डिपो वाले सेना के ब्रिगेड मुख्यालयों पर हमले हो चुके हैं।

पठानकोट का हमला भी इसी साजिश के तहत हुआ था। दो साल पहले उड़ी के ही मोहरा में भी आयुध डिपो वाले सैन्य केंद्र को निशाना बनाया गया था।

सेना के सूत्रों के मुताबिक पाक सेना ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को प्रशिक्षित कर फिदायीन दस्ता तैयार किया है। इस दस्ते को आयुध भंडार वाले भारतीय सैन्य ठिकानों को ध्वस्त करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 उड़ी में हुए फिदायीन हमले को अंजाम देने वाले आतंकी सलामाबाद नाले से रविवार सुबह ही भारतीय सीमा में घुसे थे। इन आतंकियों के पास ब्रिगेड मुख्यालय की सभी सूचनाएं थीं। यूनिट के ट्रांसफर के समय को हमले के लिए चुना गया ताकि हथियार डिपो के साथ अधिक से अधिक जवानों को हताहत किया जा सके।

 आतंकी आधुनिक हथियारों से लैस थे। उनके पास राकेट लांचर से लेकर खतरनाक विस्फोटक थे। इस कारण भारतीय सेना को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। बारामुला के 19 डिविजनल हेडक्वार्टर से हेलीकाप्टर से कमांडो उतारे जाने से पहले आतंकियों ने यूनिट के टेंट को विस्फटकों से उड़ा दिया।

सेना ने अभी एक सफ्ताह पहले दक्षिण कश्मीर में अपना ध्यान ज्यादा केंद्रित किया था। दक्षिण कश्मीर में सेना के चार हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई थी। पाकिस्तान सेना ने इस स्थिति को उत्तरी कश्मीर में हमले के ज्यादा मुफीद पाया।

उत्तरी कश्मीर से सेना की कुछ बटालियनों को दक्षिण कश्मीर भेजा गया है। इसी तरह राजोरी और पुंछ में भी आतंकियों की घुसपैठ बढ़ी है। सेना के पास इनपुट हैं कि पाकिस्तान पोषित जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा कुछ और हमलों को अंजाम दे सकता है।