परमाणु उर्जा से चलने वाली बैटरी , 100 साल तक चलेगी

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जरा सोचिए, यदि एक ऐसी बैटरी आपके घर के इन्वर्टर में लगी हो, जिसके एक बार चार्ज होने के बाद जिंदगी भर उसे बदलने की जरूरत ही ना पड़े या फिर आप बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक कार खरीदें और एक बार चार्ज करने के बाद वो अगले 100 साल तक बिना चार्जिंग के चलती रहे। ये सुनने में जरूर काल्पनिक लग रहा होगा।

लेकिन रूसी वैज्ञानिकों ने ऐसी परमाणु शक्ति चालित छोटी बैटरी विकसित कर लेने का दावा किया है, जो एक बार चार्ज होने पर 100 साल तक चलेगी। वहीं अमेरिकी सरकार का विज्ञान संगठन नासा भी इसे अपने मंगल पर मानव भेजने के मिशन के दौरान यान का बोझ कम से कम रखने के लिए सेंसरों को चलाने के लिहाज से विकसित कर रहा है।

पहले से मौजूद परमाणु बैटरियां बहुत बड़ी होती थीं, लेकिन नई खोज के बाद दिल में लगने वाले पेसमेकर की बैटरी के बराबर आकार की परमाणु बैटरी भी मौजूद होगी। मास्को के सुपरहार्ड व नॉवल कार्बन मैटीरियल्स संबंधी तकनीकी संस्थान के वैज्ञानिकों का दावा है कि उनकी बनाई परमाणु बैटरी 3300 मिलीवाट-घंटा प्रति ग्राम की ऊर्जा देती है, जो उतने ही आकार की सामान्य बैटरी से करीब 10 गुना ज्यादा ऊर्जा उत्सर्जन है।

इस शोध के निदेशक प्रोफेसर व्लादीमिर ब्लैंक का कहना है कि उनकी बनाई प्रोटोटाइप बैटरी हीरे से बने सेमीकंडक्टर (स्कॉट्टकी डायोड) और रेडियाएक्टिव रसायन से निर्मित है। इसमें बीटा रेडिएशन (इलेक्ट्रॉन व पोजिट्रॉन पर आधारित) तकनीक के कारण मानवीय कोशिकाओं पर भी कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस कारण एक बार दिल की बीमारी में लगने वाले पेसमेकर में इस बैटरी को लगा देने पर जिंदगीभर उसे बदलना ही नहीं पड़ेगा।

कैसे करती है काम

– इसमें निकिल-63 लगा है, जो विघटित होकर हाईस्पीड इलेक्ट्रॉन (बीटा पार्टिकल) छोड़ता है।
– निकिल के ही महीन पन्नीनुमा आवरण में कार्बन-14 (रेडियोएक्टिव कार्बन) से बने डायमंड कन्वर्टर इन इलेक्ट्रॉन को सोखकर बिजली पैदा करते हैं।
– बिजली कितनी बनेगी, ये निकिल आवरण और डायमंड कन्वर्टर की मोटाई पर निर्भर करेगा।